पवित्र अध्ययन
ब्रह्म के रूप में देवी
जिन पंक्तियों में देवी ब्रह्म रूप में उत्तर देती हैं।
जिन पंक्तियों में देवी ब्रह्म रूप में उत्तर देती हैं।
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1
Devī Upaniṣad 1 (Sanskrit Documents numbering)
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सभी देव देवी के पास आये। ‘महादेवि, तुम कौन हो?’ उन्होंने कहा: ‘मैं ब्रह्मस्वरूपिणी हूँ। मुझसे प्रकृति-पुरुष का जगत् है — शून्य और अशून्य।’
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2
Devī Upaniṣad 17 (Sanskrit Documents numbering)
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उनका स्वरूप ब्रह्मा आदि नहीं जानते — अतः अज्ञेया। अन्त नहीं — अतः अनन्ता। ग्रहण नहीं मिलता — अतः अलक्ष्या। जन्म नहीं मिलता — अतः अजा। वही सर्वत्र — अतः एका। वही विश्वरूपिणी — अतः नैका।
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3
Bahvṛca Upaniṣad 5 (Sanskrit Documents numbering)
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वही आत्मा हैं; उससे अन्य असत्य, अनात्मा। अतः यह ब्रह्म-संवित्ति है, भाव-अभाव की कलाओं से मुक्त: सच्चिदानन्द की लहरी, महात्रिपुरसुन्दरी, बाहर- भीतर प्रवेश कर एक रूप से चमकती हैं। ललिता नाम का एक सत्य अखण्ड अद्वितीय परब्रह्म है।
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4
Bahvṛca Upaniṣad 7 (Sanskrit Documents numbering)
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कहा जाता है ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ अथवा ‘अहं ब्रह्मास्मि’। कहा जाता है ‘तत्त्वमसि’। कहा जाता है ‘अयमात्मा ब्रह्म’ अथवा ‘ब्रह्मैव अहम् अस्मि’।