पवित्र अध्ययन
Devī Upaniṣad 1 (Sanskrit Documents numbering)
Devī Upaniṣad 1 (Sanskrit Documents numbering)
Devī Upaniṣad 1 (Sanskrit Documents numbering)
मूल शास्त्र-पाठ
सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः । कासि त्वं महादेवि । साब्रवीदहं ब्रह्मस्वरूपिणी । मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगच्छून्यं चाशून्यं च ।
IAST लिप्यन्तरण
समीपस्थ अनुवाद
सभी देव देवी के पास आये। ‘महादेवि, तुम कौन हो?’ उन्होंने कहा: ‘मैं ब्रह्मस्वरूपिणी हूँ। मुझसे प्रकृति-पुरुष का जगत् है — शून्य और अशून्य।’
पाठक-सुलभ अर्थ
पाठ देवी से पूछे प्रश्न से शुरू होता है, उत्तर वह स्वयं ब्रह्म हैं, युग्म जगत् का स्रोत।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
इस घर में पहला श्रवण स्वागत है: माँ उपनिषदों के विस्तार रूप में उत्तर देती हैं।
Devī Upaniṣad 1 as numbered in the Sanskrit Documents recension (devi.html), public-domain Devanagari. Sanskrit: public-domain Devanagari as encoded at Sanskrit Documents (sanskritdocuments.org). Foundation translations: CC BY-SA 4.0.