सभी देव देवी के पास आये। ‘महादेवि, तुम कौन हो?’ उन्होंने कहा: ‘मैं ब्रह्मस्वरूपिणी हूँ। मुझसे प्रकृति-पुरुष का जगत् है — शून्य और अशून्य।’
पाठक-सुलभ अर्थ
पाठ देवी से पूछे प्रश्न से शुरू होता है, उत्तर वह स्वयं ब्रह्म हैं, युग्म जगत् का स्रोत।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
इस घर में पहला श्रवण स्वागत है: माँ उपनिषदों के विस्तार रूप में उत्तर देती हैं।
Devī Upaniṣad 1 as numbered in the Sanskrit Documents recension (devi.html), public-domain Devanagari.Sanskrit: public-domain Devanagari as encoded at Sanskrit Documents (sanskritdocuments.org). Foundation translations: CC BY-SA 4.0.
तुलना
English
All the gods approached the Goddess. ‘Who are you, Great Goddess?’ She said: ‘I am the form of Brahman. From me is the world of prakṛti and puruṣa — empty and not-empty.’
বাংলা
সমস্ত দেবতা দেবীর কাছে এলেন। ‘মহাদেবি, তুমি কে?’ তিনি বললেন: ‘আমি ব্রহ্মস্বরূপিণী। আমা থেকে প্রকৃতি-পুরুষের জগৎ — শূন্য ও অশূন্য।’
हिन्दी
सभी देव देवी के पास आये। ‘महादेवि, तुम कौन हो?’ उन्होंने कहा: ‘मैं ब्रह्मस्वरूपिणी हूँ। मुझसे प्रकृति-पुरुष का जगत् है — शून्य और अशून्य।’
आश्रम मार्गदर्शक
उत्तर इस साइट और Brahmexa वेबसाइट समाधान से। यह श्री मीनानन्द तीर्थनाथ नहीं हैं। दीक्षा नहीं देंगे; दीक्षा पृष्ठ पर भेजेंगे।