कहा जाता है ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ अथवा ‘अहं ब्रह्मास्मि’। कहा जाता है ‘तत्त्वमसि’। कहा जाता है ‘अयमात्मा ब्रह्म’ अथवा ‘ब्रह्मैव अहम् अस्मि’।
पाठक-सुलभ अर्थ
वेदान्त के सार्वजनिक महावाक्य यहाँ उसी ज्ञान के नाम से पढ़े जाते हैं।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
आश्रम इन महावाक्यों को तकनीक नहीं बनाता; ये श्रवण हैं।
Bahvṛca Upaniṣad 7, Sanskrit Documents recension.Sanskrit: public-domain Devanagari as encoded at Sanskrit Documents (sanskritdocuments.org). Foundation translations: CC BY-SA 4.0.
तुलना
English
It is spoken as ‘prajñānaṃ brahma’ or as ‘ahaṃ brahmāsmi’. It is spoken as ‘tat tvam asi’. It is spoken as ‘ayam ātmā brahma’ or as ‘brahmaiva aham asmi’.
বাংলা
বলা হয় ‘প্রজ্ঞানং ব্রহ্ম’ অথবা ‘অহং ব্রহ্মাস্মি’। বলা হয় ‘তত্ত্বমসি’। বলা হয় ‘অয়মাত্মা ব্রহ্ম’ অথবা ‘ব্রহ্মৈব অহমস্মি’।
हिन्दी
कहा जाता है ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ अथवा ‘अहं ब्रह्मास्मि’। कहा जाता है ‘तत्त्वमसि’। कहा जाता है ‘अयमात्मा ब्रह्म’ अथवा ‘ब्रह्मैव अहम् अस्मि’।
आश्रम मार्गदर्शक
उत्तर इस साइट और Brahmexa वेबसाइट समाधान से। यह श्री मीनानन्द तीर्थनाथ नहीं हैं। दीक्षा नहीं देंगे; दीक्षा पृष्ठ पर भेजेंगे।