उनका स्वरूप ब्रह्मा आदि नहीं जानते — अतः अज्ञेया। अन्त नहीं — अतः अनन्ता। ग्रहण नहीं मिलता — अतः अलक्ष्या। जन्म नहीं मिलता — अतः अजा। वही सर्वत्र — अतः एका। वही विश्वरूपिणी — अतः नैका।
पाठक-सुलभ अर्थ
देवी के नाम उपनिषद् का अपना निषेध और विधि: एक, और विश्वरूप।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
आश्रम इसे उसी माँ के रूप में सुनता है जो काली पूजा में निकट और ब्रह्मरूप में विस्तीर्ण हैं।
Devī Upaniṣad 17, Sanskrit Documents recension.Sanskrit: public-domain Devanagari as encoded at Sanskrit Documents (sanskritdocuments.org). Foundation translations: CC BY-SA 4.0.
तुलना
English
Her own form even Brahmā and the rest do not know — therefore She is called unknowable. She has no end — therefore endless. She cannot be grasped — therefore unmarkable. Her birth is not found — therefore unborn. She alone is everywhere — therefore One. She alone is world-formed — therefore also not-one.
বাংলা
তাঁর স্বরূপ ব্রহ্মাও জানেন না — তাই অজ্ঞেয়া। অন্ত নেই — তাই অনন্তা। গ্রহণ মেলে না — তাই অলক্ষ্যা। জন্ম মেলে না — তাই অজা। তিনিই সর্বত্র — তাই একা। তিনিই বিশ্বরূপিণী — তাই নৈকা।
हिन्दी
उनका स्वरूप ब्रह्मा आदि नहीं जानते — अतः अज्ञेया। अन्त नहीं — अतः अनन्ता। ग्रहण नहीं मिलता — अतः अलक्ष्या। जन्म नहीं मिलता — अतः अजा। वही सर्वत्र — अतः एका। वही विश्वरूपिणी — अतः नैका।
आश्रम मार्गदर्शक
उत्तर इस साइट और Brahmexa वेबसाइट समाधान से। यह श्री मीनानन्द तीर्थनाथ नहीं हैं। दीक्षा नहीं देंगे; दीक्षा पृष्ठ पर भेजेंगे।