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    শুভ মহালয়া

    शुभ महालय

    10 अक्टूबर 2026 · 22 आश्विन 1433 · आश्विन अमावस्या

    पितृपक्ष की अन्तिम प्रहर समाप्त होती है। देवीपक्ष की पहली ज्योति गोपीकान्तपुर के आश्रम में जलती है। यह उषा चण्डीपाठ की उषा है — दुर्गापक्ष का मुख।

    महालय की कथा पढ़ें

    1. आश्रम का काष्ठ-द्वार, गेंदे की माला और दीप।

      द्वार के दीप

      आज महालय है, आश्विन अमावस्या। पितृपक्ष का स्मरण विश्राम पाता है, और देवीपक्ष की पहली प्रहर खुलती है। आश्रम के द्वार पर गेंदा और दीप जलते हैं। शुभ महालय।

    2. श्री मीनानन्द तीर्थनाथ होम की अग्नि संभाल रहे हैं।

      देवताओं का तेज

      महिषासुर का अहंकार स्वर्ग पर छा जाता है। देवता हिमालय की चोटी पर एकत्र होते हैं। प्रत्येक का तेज एक अग्नि में मिलता है — वही अग्नि जो आज भी आश्रम के होम में जलती है।

    3. आश्रम की प्रधान काली मूर्ति, माला और स्वर्ण-आभूषण में।

      चण्डिका का आविर्भाव

      उस एकत्र तेज से दुर्गा चण्डिका रूप धारण करती हैं। उनकी भुजाएँ दस दिशाओं तक जाती हैं। सिंह उनका वाहन है। आश्रम के मन्दिर में माँ काली का मुख इस उषा में भी जागता है — माला, स्वर्ण और गुड़हल में।

    4. माँ काली दीप, फूल और मन्दिर के खड्ग से सजी।

      अस्त्र और आभूषण

      शिव त्रिशूल देते हैं, विष्णु चक्र, इन्द्र वज्र, अग्नि शक्ति, यम दण्ड, वरुण पाश, वायु धनुष। देवता आभूषण और अस्त्र माँ के हाथ में रखते हैं। आश्रम में माँ दीप, फूल और मन्दिर के खड्ग से सजती हैं।

    5. मन्दिर की बरामदे पर रात्रि होम, श्री मीनानन्द तीर्थनाथ और गुरुमा।

      रात का युद्ध

      महिषासुर महिष, सिंह, हाथी और मनुष्य — नाना रूप धारण करता है। माँ प्रत्येक रूप के सामने खड़ी होती हैं। रात भर होम की अग्नि उस युद्ध की स्मृति जलाती है। गुरुजी और गुरुमा मन्दिर की बरामदे पर वह अग्नि संभालते हैं।

    6. होम के पास खुला शास्त्र।

      या देवी सर्वभूतेषु

      महिष गिरता है। देवता स्तव गाते हैं। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। चण्डीपाठ की यह उषा आश्रम का महालय है। शास्त्र होम के पास खुला रहता है।

    7. गुरुमा मीनाक्षी देव्यम्बा माँ काली के पास प्रणाम में।

      आश्रम का प्रणाम

      गुरुमा मीनाक्षी देव्यम्बा माँ के पास प्रणाम में बैठी हैं। दीप और गुड़हल मन्दिर सजाते हैं। यह प्रणाम दुर्गापक्ष का पहला प्रणाम है।

    8. बीरभूम के हरे खेतों में खड़ा आश्रम मन्दिर।

      दुर्गापक्ष का मुख

      दुर्गापक्ष खुलता है। गोपीकान्तपुर, कोपाइ, बीरभूम के खेतों में आश्रम का मन्दिर खड़ा होकर इस दिन को पालता है। पूजा में आने से पहले +91 9831117349 पर फ़ोन करें — आश्रम आपका स्वागत करेगा और उस दिन का कार्यक्रम बताएगा।

    calendar · +91 9831117349

    गोपीकान्तपुर, कोपाई, बीरभूम, पश्चिम बंगाल

    श्री मीनानन्द आश्रम

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    श्री मीनानन्द Foundation पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में गोपीकान्तपुर स्थित श्री मीनानन्द आश्रम का संचालन करता है। श्री मीनानन्द तीर्थनाथ के मार्गदर्शन में यहाँ तंत्र साधना, पूजा, कीर्तन, आध्यात्मिक शिक्षा, अन्नदान और पशु-पक्षियों की देखभाल होती है।

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    Tantra is the religion of mankind but humanity is the religion of this universe.

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