श्री मीनानन्द फाउण्डेशन
आश्रम का भोजन और प्रसाद
पूजा के बाद अतिथि और आश्रम के लोग साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। उस दिन की व्यवस्था पहले पूछ लें।
सामुदायिक भोजन आश्रम का आतिथ्य और उत्सव-जीवन है। पहले मन्दिर खाता है। फिर लोग प्रसाद पर बैठते हैं — केले के पत्ते, पंक्ति, भरी रसोई।
शामियाने के नीचे या घास पर आकर बैठें। अन्न, साग, या भोजन का कोष देना चाहें तो पहले लिखें, ताकि रसोई वही ले सके जिसे पका सके।
कैसे सहयोग करें
अन्न, साग, या भोजन का कोष पहले लिखकर दिया जा सकता है। आश्रम का एक प्रतिनिधि बताएगा कि योगदान सहायता बनकर कैसे पहुँचे।