आत्मा का अखण्ड मण्डल रूप में ध्यान करें, पूरे ब्रह्माण्ड को ढककर, स्वप्रकाश। ॐ। श्रीगुरु सर्वकारण शक्ति हैं। उससे देह नौ रन्ध्रों का रूप है। श्रीचक्र नौ शक्तियों का रूप है।
पाठक-सुलभ अर्थ
समन्वय, उद्धृत: गुरु सर्वकारण शक्ति; देह के नौ रन्ध्र; श्रीचक्र की नौ शक्तियाँ।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
इस पथ का अन्वेषक अध्ययन-मेज़ है। प्रतिष्ठित चक्र नहीं, पद्धति नहीं।
Bhāvanā / Śrīcakra Upaniṣad opening, Sanskrit Documents recension (bhaava.html). Recensions differ.Sanskrit: public-domain Devanagari as encoded at Sanskrit Documents (sanskritdocuments.org). Foundation translations: CC BY-SA 4.0.
तुलना
English
One should contemplate the Self as an unbroken circle, covering the whole egg of Brahmā, self-luminous. Oṃ. The blessed Guru is the Śakti who is the cause of all. Thereby the body is of the form of nine apertures. The Śrīcakra is of the form of nine śaktis.
বাংলা
আত্মাকে অখণ্ড মণ্ডলরূপে ধ্যান করুন, সমস্ত ব্রহ্মাণ্ড ঢেকে, স্বপ্রকাশ। ওঁ। শ্রীগুরু সর্বকারণ শক্তি। তাতে দেহ নয় রন্ধ্রের রূপ। শ্রীচক্র নয় শক্তির রূপ।
हिन्दी
आत्मा का अखण्ड मण्डल रूप में ध्यान करें, पूरे ब्रह्माण्ड को ढककर, स्वप्रकाश। ॐ। श्रीगुरु सर्वकारण शक्ति हैं। उससे देह नौ रन्ध्रों का रूप है। श्रीचक्र नौ शक्तियों का रूप है।
आश्रम मार्गदर्शक
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