Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

पवित्र अध्ययन

भावना उपनिषद्

देह नौ द्वार; श्रीचक्र नौ शक्तियाँ — ध्यान, पद्धति नहीं।

पहला अंश खुला है

श्रीचक्र, देह और चेतना के ध्यान-सम्बद्ध समन्वय।

भावनोपनिषद्, श्रीचक्रोपनिषद् नाम से भी छपी, अन्तर-इन्द्रियों को श्रीचक्र की ज्यामिति से मिलाती है। गुरु सर्वकारण शक्ति, देह नौ रन्ध्र, श्रीचक्र नौ शक्तियाँ। ज्ञाता-ज्ञान-ज्ञेय एक ध्यान — बाह्य उपचार का क्रम नहीं।

संस्कृत डॉक्यूमेंट्स दो-तीन पाठ कहते हैं। इस स्थल की मुक्तिका ८४ (अथर्ववेद)। पन्शीकर ८७। इस पथ का अन्वेषक केवल खुली देवनागरी उद्धृत करता है; भास्करराय चुपचाप नहीं मिलाया जाता।

चित्र शिक्षा का खाका है। प्रतिष्ठित यन्त्र नहीं, गुरु-दत्त पद्धति का विकल्प नहीं।

मुक्तिका ८४, अथर्ववेद। संस्कृत डॉक्यूमेंट्स ८४/१०८; पन्शीकर ८७/१०८। पाठभेद हैं।

शान्ति के बाद गद्य समन्वय; संहिता जैसी श्लोक-संख्या नहीं। यह ग्रन्थालय चार उद्धृत इकाइयाँ खोलता है।

मुक्तिका ८४, अथर्ववेद। संस्कृत डॉक्यूमेंट्स ८४/१०८; पन्शीकर ८७/१०८। पाठभेद हैं।

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समीक्षा में रोके गये पाठ

  • upachara-inner — मूल पंक्तियाँ मन्त्राक्षर रखती हैं; यह पृष्ठ विद्या का संचालन न बने इसलिए रोकी गईं।

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