Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

पवित्र अध्ययन

सीता उपनिषद्

देव प्रजापति से पूछते हैं: सीता कौन, किस रूप की?

पहला अंश खुला है

आदि प्रकृति और दिव्य शक्ति के रूप में सीता।

सीता उपनिषद् (मुक्तिका ४५, अथर्ववेद) शाक्त पाठ है, रामायण की कथा नहीं। देव प्रजापति से पूछते हैं सीता कौन। वह कहते हैं वह मूलप्रकृति है, इच्छा-ज्ञान-क्रिया, महालक्ष्मी।

यह पृष्ठ उपनिषद् की सीता को वाल्मीकि कक्ष की महाकाव्यात्मक कथा से अलग रखता है। नाम का अक्षर-रहस्य पारम्परिक पाठ है, निकाला मन्त्र नहीं।

मुक्तिका ४५, अथर्ववेद, शाक्त। संस्कृत डॉक्यूमेंट्स: ४५/१०८।

शान्ति के बाद सतत गद्य उपदेश, अन्त में इत्युपनिषत्। यह ग्रन्थालय तीन उद्धृत अंश खोलता है।

मुक्तिका ४५, अथर्ववेद, शाक्त। संस्कृत डॉक्यूमेंट्स: ४५/१०८।

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