devā ha vai prajāpatim abruvan kā sītā kiṃ rūpam iti | sa hovāca prajāpatiḥ sā sīteti | mūlaprakṛtirūpatvāt sā sītā prakṛtiḥ smṛtā |
समीपस्थ अनुवाद
देवों ने प्रजापति से कहा: ‘सीता कौन? किस रूप की?’ प्रजापति ने कहा: ‘वह सीता हैं। मूलप्रकृति-रूप होने से सीता प्रकृति कही जाती हैं।’
पाठक-सुलभ अर्थ
उपनिषद् का संवाद, महाकाव्य का वन नहीं। सीता मूलप्रकृति नाम से।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
इस पत्र को रामायण कक्ष के पास रखें, दोनों श्रवण न मिलाएँ।
Sītā Upaniṣad opening, Sanskrit Documents recension (sita.html).Sanskrit: public-domain Devanagari as encoded at Sanskrit Documents (sanskritdocuments.org). Foundation translations: CC BY-SA 4.0.
तुलना
English
The gods said to Prajāpati: ‘Who is Sītā? Of what form?’ Prajāpati said: ‘She is Sītā. Because She has the form of root-prakṛti, Sītā is remembered as Prakṛti.’
বাংলা
দেবতা প্রজাপতিকে বললেন: ‘সীতা কে? কী রূপ?’ প্রজাপতি বললেন: ‘তিনি সীতা। মূলপ্রকৃতিরূপ বলে সীতা প্রকৃতি বলে স্মৃত।’
हिन्दी
देवों ने प्रजापति से कहा: ‘सीता कौन? किस रूप की?’ प्रजापति ने कहा: ‘वह सीता हैं। मूलप्रकृति-रूप होने से सीता प्रकृति कही जाती हैं।’
आश्रम मार्गदर्शक
उत्तर इस साइट और Brahmexa वेबसाइट समाधान से। यह श्री मीनानन्द तीर्थनाथ नहीं हैं। दीक्षा नहीं देंगे; दीक्षा पृष्ठ पर भेजेंगे।