पवित्र अध्ययन
Sītā Upaniṣad, opening (Sanskrit Documents recension)
Sītā Upaniṣad, opening (Sanskrit Documents recension)
Sītā Upaniṣad, opening (Sanskrit Documents recension)
मूल शास्त्र-पाठ
देवा ह वै प्रजापतिमब्रुवन्का सीता किं रूपमिति । स होवाच प्रजापतिः सा सीतेति । मूलप्रकृतिरूपत्वात्सा सीता प्रकृतिः स्मृता ।
IAST लिप्यन्तरण
समीपस्थ अनुवाद
देवों ने प्रजापति से कहा: ‘सीता कौन? किस रूप की?’ प्रजापति ने कहा: ‘वह सीता हैं। मूलप्रकृति-रूप होने से सीता प्रकृति कही जाती हैं।’
पाठक-सुलभ अर्थ
उपनिषद् का संवाद, महाकाव्य का वन नहीं। सीता मूलप्रकृति नाम से।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
इस पत्र को रामायण कक्ष के पास रखें, दोनों श्रवण न मिलाएँ।
Sītā Upaniṣad opening, Sanskrit Documents recension (sita.html). Sanskrit: public-domain Devanagari as encoded at Sanskrit Documents (sanskritdocuments.org). Foundation translations: CC BY-SA 4.0.