पवित्र अध्ययन
अदृश्य विकास का सूत्र
অদৃশ্যমান বিবর্তনই বিজ্ঞান — वह जीवन्त अन्तराल जहाँ जीवन खिलता है, चेतना खिलती है।
অদৃশ্যমান বিবর্তনই বিজ্ঞান — वह जीवन्त अन्तराल जहाँ जीवन खिलता है, चेतना खिलती है।
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1
Īśāvāsya Upaniṣad 1 (Vājasaneyi Saṃhitā, eighteen-mantra numbering)
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ईश से यह सब आच्छादित है, जगत् में जो कुछ चलता है। त्याग के साथ भोगो; किसी के धन का लोभ मत करो।
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2
Sāvitrī Upaniṣad 1 (Sanskrit Documents numbering)
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सवितृ कौन? सावित्री कौन? अग्नि ही सवितृ हैं; पृथ्वी सावित्री। जहाँ अग्नि, वहाँ पृथ्वी; जहाँ पृथ्वी, वहाँ अग्नि। वे दो योनियाँ एक मिथुन हैं।
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3
Bhāvanā Upaniṣad, opening (Sanskrit Documents recension)
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आत्मा का अखण्ड मण्डल रूप में ध्यान करें, पूरे ब्रह्माण्ड को ढककर, स्वप्रकाश। ॐ। श्रीगुरु सर्वकारण शक्ति हैं। उससे देह नौ रन्ध्रों का रूप है। श्रीचक्र नौ शक्तियों का रूप है।
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4
Bhagavad Gītā 4.24 (vulgate)
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ब्रह्म ही अर्पण, ब्रह्म ही हवि, ब्रह्माग्नि में ब्रह्म द्वारा हुत। ब्रह्मकर्म में समाहित का गन्तव्य ब्रह्म ही है।