पवित्र अध्ययन
Sāvitrī Upaniṣad 1 (Sanskrit Documents numbering)
Sāvitrī Upaniṣad 1 (Sanskrit Documents numbering)
Sāvitrī Upaniṣad 1 (Sanskrit Documents numbering)
मूल शास्त्र-पाठ
कः सविता का सावित्री अग्निरेव सविता पृथिवी सावित्री स यत्राग्निस्तत्पृथिवी यत्र वै पृथिवी तत्राग्निस्ते द्वे योनी तदेकं मिथुनम् ॥
IAST लिप्यन्तरण
समीपस्थ अनुवाद
सवितृ कौन? सावित्री कौन? अग्नि ही सवितृ हैं; पृथ्वी सावित्री। जहाँ अग्नि, वहाँ पृथ्वी; जहाँ पृथ्वी, वहाँ अग्नि। वे दो योनियाँ एक मिथुन हैं।
पाठक-सुलभ अर्थ
पूरकता इस उपनिषद् की विधि है: जोड़े-जोड़े एक मिथुन।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
सार्वजनिक गायत्री पहले से सवितृ को नाम देती है। यह पत्र सावित्री को उस प्रकाश की युग्म पृथ्वी के रूप में जोड़ता है।
Sāvitrī Upaniṣad 1, Sanskrit Documents recension (savitri_u.html). Sanskrit: public-domain Devanagari as encoded at Sanskrit Documents (sanskritdocuments.org). Foundation translations: CC BY-SA 4.0.