শুভ মহালয়া शुभ महालय 10 अक्टूबर 2026 · 22 आश्विन 1433 · आश्विन अमावस्या

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    Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

    पवित्र अध्ययन

    Bhagavad Gītā 4.24 (vulgate)

    Bhagavad Gītā 4.24 (vulgate)

    Bhagavad Gītā 4.24 (vulgate)

    मूल शास्त्र-पाठ

    ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् । ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥

    IAST लिप्यन्तरण

    brahmārpaṇaṃ brahma havir brahmāgnau brahmaṇā hutam | brahmaiva tena gantavyaṃ brahmakarmasamādhinā ||

    समीपस्थ अनुवाद

    ब्रह्म ही अर्पण, ब्रह्म ही हवि, ब्रह्माग्नि में ब्रह्म द्वारा हुत। ब्रह्मकर्म में समाहित का गन्तव्य ब्रह्म ही है।

    पाठक-सुलभ अर्थ

    भोजन पर कई घर जो श्लोक कहते हैं: भोजन ही यज्ञ है, उसका प्रत्येक अंश ब्रह्म।

    मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या

    आश्रम भोजन पर बैठे तो यह पंक्ति प्रसाद-वाणी हो सकती है। मंत्र-संग्रह में वही संस्कृत गृह-पत्र पर है।

    पदार्थ

    • ब्रह्म — ब्रह्म
    • हविः — हवि

    Gītā 4.24; also the public bhojana-mantra printed in the mantra library. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.