पवित्र अध्ययन
Īśāvāsya Upaniṣad 1 (Vājasaneyi Saṃhitā, eighteen-mantra numbering)
Īśāvāsya Upaniṣad 1 (Vājasaneyi Saṃhitā, eighteen-mantra numbering)
Īśāvāsya Upaniṣad 1 (Vājasaneyi Saṃhitā, eighteen-mantra numbering)
मूल शास्त्र-पाठ
ईशा वास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् । तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्य स्विद्धनम् ॥
IAST लिप्यन्तरण
समीपस्थ अनुवाद
ईश से यह सब आच्छादित है, जगत् में जो कुछ चलता है। त्याग के साथ भोगो; किसी के धन का लोभ मत करो।
पाठक-सुलभ अर्थ
पहला शब्द ईशा पूरे उपनिषद् को बैठाता है: जगत् प्रभु का वास है, भोग त्याग से जुड़ा है।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
यह आश्रम श्लोक को जगत् के प्रति विनम्रता कहकर सुनता है: जो दिया जाए लो, छीनो मत। वही विनम्रता पूजा है।
पदार्थ
- ईशा — ईश से
- वास्यम् — आच्छादनीय
- भुञ्जीथाः — भोगो
Īśāvāsya 1, Vājasaneyi numbering of eighteen mantras; public-domain Devanagari. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.