पवित्र अध्ययन
आत्मन्
उपनिषद् की चर्चा में आत्मा का अर्थ आंतरिक चेतन सत्ता है—शरीर, इंद्रिय और मन के बदलते स्तर से भिन्न वह उपस्थिति। विभिन्न दर्शन ब्रह्म के साथ उसके संबंध की व्याख्या अलग-अलग करते हैं; यह पुस्तकालय उन भेदों को दिखाता है, उन्हें एक सूत्र में नहीं समेटता। यहाँ यह शब्द व्यक्तित्व या मनोदशा का पर्याय नहीं है। मूल पाठ, अनुवाद और आश्रम-चिंतन अलग स्वर में रखे जाते हैं।
उपनिषद् की चर्चा में आत्मा का अर्थ आंतरिक चेतन सत्ता है—शरीर, इंद्रिय और मन के बदलते स्तर से भिन्न वह उपस्थिति। विभिन्न दर्शन ब्रह्म के साथ उसके संबंध की व्याख्या अलग-अलग करते हैं; यह पुस्तकालय उन भेदों को दिखाता है, उन्हें एक सूत्र में नहीं समेटता। यहाँ यह शब्द व्यक्तित्व या मनोदशा का पर्याय नहीं है। मूल पाठ, अनुवाद और आश्रम-चिंतन अलग स्वर में रखे जाते हैं।