শুভ মহালয়া शुभ महालय 10 अक्टूबर 2026 · 22 आश्विन 1433 · आश्विन अमावस्या

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    Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

    पवित्र अध्ययन

    त्वमेव माता

    Public pranāma śloka (anon. traditional; often at the close of puja).

    Public pranāma śloka (anon. traditional; often at the close of puja).

    मूल शास्त्र-पाठ

    त्वमेव माता च पिता त्वमेव । त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव । त्वमेव सर्वं मम देव देव ॥

    IAST लिप्यन्तरण

    tvam eva mātā ca pitā tvam eva | tvam eva bandhuś ca sakhā tvam eva | tvam eva vidyā draviṇaṃ tvam eva | tvam eva sarvaṃ mama deva deva ||

    समीपस्थ अनुवाद

    तुम्हीं माता, तुम्हीं पिता। तुम्हीं बन्धु और सखा। तुम्हीं विद्या और धन। तुम्हीं मेरे सब, हे देवदेव।

    पाठक-सुलभ अर्थ

    समर्पण का श्लोक: प्रेम में जो भी मानवीय सम्बन्ध कहा जाता है, सब आसन पर सम्बोधित उस एक में जुड़ जाता है।

    मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या

    देवी, शिव या कृष्ण — आसन के देवता जो भी हों — यह समाप्ति उन्हीं को मिलती है। आश्रम में पूजा के अन्त में गाया जाता है, ताकि घर उस उपस्थिति में लौट आए। इस मन्त्र का गहरा अर्थ, जप की लय या दीक्षा का मार्ग जानने के लिए मीनानन्द आश्रम से सम्पर्क कीजिए।

    साधना का प्रसंग

    समाप्ति का प्रणाम, एक या तीन बार। घर का अन्तिम क्रम आश्रम में सीखिए।

    पदार्थ

    • माता — माता
    • द्रविणम् — धन

    Anonymous public pranāma; Sanskrit public domain. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.