पवित्र अध्ययन
त्वमेव माता
Public pranāma śloka (anon. traditional; often at the close of puja).
Public pranāma śloka (anon. traditional; often at the close of puja).
मूल शास्त्र-पाठ
त्वमेव माता च पिता त्वमेव । त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव । त्वमेव सर्वं मम देव देव ॥
IAST लिप्यन्तरण
समीपस्थ अनुवाद
तुम्हीं माता, तुम्हीं पिता। तुम्हीं बन्धु और सखा। तुम्हीं विद्या और धन। तुम्हीं मेरे सब, हे देवदेव।
पाठक-सुलभ अर्थ
समर्पण का श्लोक: सब मानवी सम्बन्ध उसी में सिमटते हैं जिसे कहा जा रहा है।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
देवी, शिव, कृष्ण — जो उस आसन के देवता हैं। आश्रम पूजा के अन्त में गाता है, घर को लौटाता है।
साधना का प्रसंग
समाप्ति का प्रणाम, एक या तीन बार।
पदार्थ
- माता — माता
- द्रविणम् — धन
Anonymous public pranāma; Sanskrit public domain. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.