पवित्र अध्ययन
लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु
Public well-being line (anon. traditional; often appended to śānti).
Public well-being line (anon. traditional; often appended to śānti).
मूल शास्त्र-पाठ
लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु
IAST लिप्यन्तरण
lokāḥ samastāḥ sukhino bhavantu
समीपस्थ अनुवाद
सब लोक सुखी हों।
पाठक-सुलभ अर्थ
प्रत्येक लोक कल्याण में रहे — छोटी कामना।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
कीर्तन और पूजा के अन्त में अनेक भारतीय घरों में, इस आश्रम में भी। विशेष देवता के स्तव के बाद कक्ष को चौड़ा करता है।
साधना का प्रसंग
समाप्ति-पंक्ति; गिनती नहीं।
पदार्थ
- लोकाः — लोक
- समस्ताः — समस्त
Anonymous public line; not a saṃhitā ṛk. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.