पवित्र अध्ययन
सर्वे भवन्तु सुखिनः
Public well-being verse (anon. traditional; widely used as maṅgala, not a saṃhitā ṛk).
Public well-being verse (anon. traditional; widely used as maṅgala, not a saṃhitā ṛk).
मूल शास्त्र-पाठ
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥
IAST लिप्यन्तरण
समीपस्थ अनुवाद
सब सुखी हों। सब नीरोग हों। सब मङ्गल देखें। कोई दुःखभागी न हो।
पाठक-सुलभ अर्थ
सब प्राणियों के सुख और स्वास्थ्य की सार्वजनिक प्रार्थना।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
यह घर श्लोक को समाप्ति की मङ्गलकामना मानता है, वैदिक दावे के रूप में नहीं। करुणा यहाँ साधारण और चौड़ी है।
साधना का प्रसंग
पूजा या सभा के अन्त में।
पदार्थ
- निरामयाः — नीरोग
- भद्राणि — मङ्गल
Anonymous public maṅgala śloka; not claimed as Ṛgveda. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.