Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

पवित्र अध्ययन

जीवन्त धारणाएँ

शास्त्र-कक्ष खोलने वाले शब्दों का छोटा जाल।

प्रारूप — समीक्षा बाकी

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आत्मन् वह आत्मा जिसकी ओर अध्ययन सदा संकेत करता है — श्वास से भी निकट। ब्रह्मन् उपनिषदों में नामित विस्तार, यहाँ पूजा और मौन की भूमि के रूप में सुना जाता है। धर्म जीवन को ऐसा धारण कि उसे अर्पित किया जा सके — क्षेत्र, कर्तव्य और करुणा साथ। कर्म क्रिया, और कर्म का पकना। इस घर में कर्म सेवा भी है, फल छीने बिना। यज्ञ अग्नि में हवि, और अर्पण के रूप में दिया कोई भी कार्य। आँगन का होम एक रूप है; रसोई भी हो सकती है। योग जोड़। गीता समत्व को योग कहती है; यह आश्रम बैठना, कीर्तन और सत्य काम को भी कहता है। भक्ति जानने के मार्ग के रूप में भक्ति — जीभ पर नाम रखने वाला प्रेम। ज्ञान वह ज्ञान जो घर को स्थिर रखता है। अध्ययन, श्रवण और गुरु-वाक्य साथ चलते हैं। शक्ति देवी शक्ति और माँ। इस आश्रम की सार्वजनिक शिक्षा उन्हें काली पूजा और दैनिक काम के पास रखती है। मोक्ष मुक्ति। विनम्रता से नाम: साधना की दिशा, गुरु की देखरेख में प्राप्त। मन्त्र स्मरण के लिए नापा स्वर। सार्वजनिक मन्त्र संग्रह में; दीक्षा-मन्त्र गुरु के पास। गुरु जीवित शिक्षक। इस आश्रम में श्री मीनानन्द तीर्थनाथ; शब्द पूरी परम्परा को भी नाम देता है। देवी इन उपनिषदों में देवी — ब्रह्म, माँ, जो उत्तर देती हैं। प्रकृति मूल प्रकृति; सीता उपनिषद् में सीता मूलप्रकृति। त्रिपुरा तीन पुर, तीन पथ; इस वृत्त में त्रिपुरसुन्दरी। श्रीविद्या श्री के ध्यान-ज्ञान का नाम। संचालन-संकेत यहाँ प्रकाशित नहीं। श्रीचक्र भावनोपनिषद् में नौ शक्तियों की ज्यामिति। शिक्षा का खाका, प्रतिष्ठित यन्त्र नहीं। यन्त्र धारण-चित्र। सार्वजनिक पृष्ठ वर्णन करते हैं; दीक्षा नहीं देते। भावना ध्यान-समन्वय — भावनोपनिषद् की विधि। विद्या ज्ञान जो अर्थ प्रकाशित करे, जैसा सरस्वतीरहस्य पूछता है। वाक् सावित्री उपनिषद् में मन की जोड़ी वाक्। श्री मन्दिर का मङ्गल और सौभाग्यलक्ष्मी। अन्नपूर्णा पोषण की देवी, ज्ञान जो भरता है। सावित्री सवितृ की युग्म नीति — पृथ्वी, आपः, वाक्। अद्वैत बह्वृच में ललिता नाम से अद्वितीय ब्रह्म। सूक्ष्म शरीर भावनोपनिषद् में नाड़ियाँ और अन्तर-इन्द्रियाँ। अदृश्य विकास অদৃশ্যমান বিবর্তনই বিজ্ঞান — डार्विन का जीवन-विकास और उपनिषद् की चेतना-स्फुरण एक विज्ञान। दिव्य सत्ता नक्षत्रों के बीच का जीवन्त अन्तराल। सीता उपनिषद् की सीता: मूलप्रकृति, महाकाव्य के वन से अलग।