पवित्र अध्ययन
त्रिपुरा उपनिषद्
तीन पुर, तीन पथ, देवी का प्राचीन माहात्म्य।
पहला अंश खुला है
त्रिपुरसुन्दरी, श्रीविद्या और चेतना के त्रिविध प्रकाशन।
त्रिपुरा उपनिषद् मुक्तिका में ऋग्वेद के साथ (सं. ८२)। सोलह मन्त्रों में तीन पुर और तीन पथ, आदिशक्ति पाश-धनुष-पाँच बाण, भग और शक्ति सौभाग्यदाता।
एक स्रोत-अंश खुला है। मन्त्राक्षर रोके गये। इस आश्रम का सार्वजनिक श्रीचक्र जीवन्त चित्र है; यह पृष्ठ अनुष्ठान-यन्त्र नहीं छापता।
मुक्तिका ८२, ऋग्वेद। संस्कृत डॉक्यूमेंट्स: ८२/१०८, ऋग्वेद, शाक्त।
संस्कृत डॉक्यूमेंट्स पाठ में सोलह अंकित मन्त्र।
मुक्तिका ८२, ऋग्वेद। संस्कृत डॉक्यूमेंट्स: ८२/१०८, ऋग्वेद, शाक्त।
समीक्षा में रोके गये पाठ
- 8 — मूल पंक्तियाँ मन्त्राक्षर रखती हैं; यह पृष्ठ विद्या का संचालन न बने इसलिए रोकी गईं।
- 9 — मूल पंक्तियाँ मन्त्राक्षर रखती हैं; यह पृष्ठ विद्या का संचालन न बने इसलिए रोकी गईं।