पवित्र अध्ययन
शक्ति और चेतना
शक्ति जो बाहर-भीतर चेतना में भरती है।
शक्ति जो बाहर-भीतर चेतना में भरती है।
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1
Bahvṛca Upaniṣad 5 (Sanskrit Documents numbering)
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वही आत्मा हैं; उससे अन्य असत्य, अनात्मा। अतः यह ब्रह्म-संवित्ति है, भाव-अभाव की कलाओं से मुक्त: सच्चिदानन्द की लहरी, महात्रिपुरसुन्दरी, बाहर- भीतर प्रवेश कर एक रूप से चमकती हैं। ललिता नाम का एक सत्य अखण्ड अद्वितीय परब्रह्म है।
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2
Bhāvanā Upaniṣad, opening (Sanskrit Documents recension)
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आत्मा का अखण्ड मण्डल रूप में ध्यान करें, पूरे ब्रह्माण्ड को ढककर, स्वप्रकाश। ॐ। श्रीगुरु सर्वकारण शक्ति हैं। उससे देह नौ रन्ध्रों का रूप है। श्रीचक्र नौ शक्तियों का रूप है।
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3
Tripurā Upaniṣad 1 (Sanskrit Documents numbering)
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ॐ। तीन पुर, तीन पथ, विश्व को देखने वाली; यहाँ अव्यक्त अक्षर बैठे हैं। उनकी अधिष्ठात्री अजरा पुराणी — देवताओं की बड़ी महिमा।