Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

पवित्र अध्ययन

सौभाग्यलक्ष्मी उपनिषद्

देव नारायण से सौभाग्यलक्ष्मी-विद्या कहने को कहते हैं।

पहला अंश खुला है

श्री, सूक्ष्मदेह के प्रतीक, योग-ध्यान और आध्यात्मिक सौभाग्य।

सौभाग्यलक्ष्मी (मुक्तिका १०५, ऋग्वेद) देवों के आदिनारायण से विद्या माँगने से खुलती है। बाद में योग और सूक्ष्मदेह।

न्यास, बीजलेख और गृह-फल रोके गये। सार्वजनिक द्वार आरम्भ का संवाद है। कराग्रे वसते लक्ष्मीः मन्त्र-संग्रह में श्री का स्मरण है।

मुक्तिका १०५, ऋग्वेद। संस्कृत डॉक्यूमेंट्स: सौभाग्यलक्ष्मी।

मुद्रित पाठ में अनेक खण्ड। यह ग्रन्थालय आरम्भ का संवाद खोलता है।

मुक्तिका १०५, ऋग्वेद। संस्कृत डॉक्यूमेंट्स: सौभाग्यलक्ष्मी।

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समीक्षा में रोके गये पाठ

  • nyasa — मूल पंक्तियाँ मन्त्राक्षर रखती हैं; यह पृष्ठ विद्या का संचालन न बने इसलिए रोकी गईं।
  • phala — फलश्रुति और जप-गणना समीक्षा में; यह घर उन्हें साधना-निर्देश के रूप में नहीं छापता।

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