पवित्र अध्ययन
Devī Upaniṣad 4 (Sanskrit Documents numbering)
Devī Upaniṣad 4 (Sanskrit Documents numbering)
Devī Upaniṣad 4 (Sanskrit Documents numbering)
मूल शास्त्र-पाठ
तामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीं वैरोचनीं कर्मफलेषु जुष्टाम् । दुर्गां देवीं शरणमहं प्रपद्ये सुतरां नाशयते तमः ॥
IAST लिप्यन्तरण
समीपस्थ अनुवाद
उस अग्निवर्णा, तप से ज्वलित, कर्मफलों में सेवित दुर्गा देवी की शरण लेता हूँ। वह अन्धकार का अत्यन्त नाश करती हैं।
पाठक-सुलभ अर्थ
शरण दुर्गा नाम से, जो अन्धकार जलाती हैं — इस आश्रम के काली-दिनों के पास का सार्वजनिक स्तोत्र।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
मन्त्र-संग्रह के दुर्गा-स्तोत्र इस पंक्ति के पास बैठते हैं। घर के साथ बैठक अब भी पुकार से शुरू होती है।
Devī Upaniṣad 4, Sanskrit Documents recension. Sanskrit: public-domain Devanagari as encoded at Sanskrit Documents (sanskritdocuments.org). Foundation translations: CC BY-SA 4.0.