उस अग्निवर्णा, तप से ज्वलित, कर्मफलों में सेवित दुर्गा देवी की शरण लेता हूँ। वह अन्धकार का अत्यन्त नाश करती हैं।
पाठक-सुलभ अर्थ
शरण दुर्गा नाम से, जो अन्धकार जलाती हैं — इस आश्रम के काली-दिनों के पास का सार्वजनिक स्तोत्र।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
मन्त्र-संग्रह के दुर्गा-स्तोत्र इस पंक्ति के पास बैठते हैं। घर के साथ बैठक अब भी पुकार से शुरू होती है।
Devī Upaniṣad 4, Sanskrit Documents recension.Sanskrit: public-domain Devanagari as encoded at Sanskrit Documents (sanskritdocuments.org). Foundation translations: CC BY-SA 4.0.
तुलना
English
I take refuge in that Goddess Durgā, fire-hued, blazing by tapas, the radiant one resorted to in the fruits of acts. She utterly destroys darkness.
বাংলা
সেই অগ্নিবর্ণা, তপস্যায় জ্বলা, কর্মফলে সেবা পাওয়া দুর্গা দেবীর শরণ নিই। তিনি অন্ধকার সম্পূর্ণ নাশ করেন।
हिन्दी
उस अग्निवर्णा, तप से ज्वलित, कर्मफलों में सेवित दुर्गा देवी की शरण लेता हूँ। वह अन्धकार का अत्यन्त नाश करती हैं।
आश्रम मार्गदर्शक
उत्तर इस साइट और Brahmexa वेबसाइट समाधान से। यह श्री मीनानन्द तीर्थनाथ नहीं हैं। दीक्षा नहीं देंगे; दीक्षा पृष्ठ पर भेजेंगे।