শুভ মহালয়া शुभ महालय 10 अक्टूबर 2026 · 22 आश्विन 1433 · आश्विन अमावस्या

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    Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

    पवित्र अध्ययन

    ṚV 3.62.10 (Savitr Gāyatrī; saṃhitā line without the vyāhṛti prefix)

    ṚV 3.62.10 (Savitr Gāyatrī; saṃhitā line without the vyāhṛti prefix)

    ṚV 3.62.10 (Savitr Gāyatrī; saṃhitā line without the vyāhṛti prefix)

    मूल शास्त्र-पाठ

    तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

    IAST लिप्यन्तरण

    tat savitur vareṇyaṃ bhargo devasya dhīmahi | dhiyo yo naḥ pracodayāt ||

    समीपस्थ अनुवाद

    सवितृ देव के उस वरणीय तेज पर हम ध्यान करते हैं; वह हमारी धियों को प्रेरित करे।

    पाठक-सुलभ अर्थ

    गायत्री की संहिता-पंक्ति; मन्त्र-पत्र पर जो भूर् भुवः स्वः उपसर्ग बाद में जुड़ता है, यहाँ नहीं है।

    मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या

    घर इस ऋक् के साथ व्याहृतियाँ कहते हैं। मंत्र-संग्रह में वह जीवित रूप है; यह श्लोक संहिता का अंक रखता है।

    पदार्थ

    • सवितुः — सवितृ का
    • वरेण्यम् — वरणीय
    • धीमहि — ध्यान करते हैं

    Śākala Ṛgveda 3.62.10; Gāyatrī saṃhitā-pāṭha without vyāhṛtis. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.