पवित्र अध्ययन
वक्रतुण्ड महाकाय
Public Gāṇapatya śloka; widely printed in household paddhatis (anon. traditional).
Public Gāṇapatya śloka; widely printed in household paddhatis (anon. traditional).
मूल शास्त्र-पाठ
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
IAST लिप्यन्तरण
समीपस्थ अनुवाद
हे वक्रतुण्ड, महाकाय, करोड़ सूर्य की प्रभा — देव, मेरे सब कार्यों में सदा निर्विघ्न करो।
पाठक-सुलभ अर्थ
गणेश के सार्वजनिक रूप से गृह-प्रार्थना: काम अटके नहीं।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
विद्यार्थी और दुकानदार दोनों यह श्लोक जानते हैं। आश्रम ‘निर्विघ्नम्’ को साफ पथ की विनती सुनता है, हर असुविधा का जादू नहीं।
साधना का प्रसंग
पाठ या यात्रा से पहले प्रायः एक बार।
पदार्थ
- वक्रतुण्ड — वक्रशुण्ड
- निर्विघ्नम् — निर्विघ्न
Anonymous public Gāṇapatya śloka in household use; Sanskrit public domain. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.