पवित्र अध्ययन
उदु त्यं जातवेदसम्
ṚV 1.50.1 (Sūrya).
ṚV 1.50.1 (Sūrya).
मूल शास्त्र-पाठ
उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः । दृशे विश्वाय सूर्यम् ॥
IAST लिप्यन्तरण
समीपस्थ अनुवाद
केतु उस देव जातवेदस् को ऊपर ढोते हैं — सूर्य को — सारा विश्व देखे।
पाठक-सुलभ अर्थ
सूर्योदय की ऋक्: रश्मि दृश्य देव को उठाती है — जगत् उसे देखे।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
सवितृ गायत्री प्रार्थना है; यह ऋक् दर्शन है। साथ में सूर्य प्रकाश और प्रेरक दोनों रहते हैं। आश्रम में प्रातः पाठ नेत्र और बुद्धि को साथ पूर्व की ओर मोड़ता है। इस मन्त्र का गहरा अर्थ, जप की लय या दीक्षा का मार्ग जानने के लिए मीनानन्द आश्रम से सम्पर्क कीजिए।
साधना का प्रसंग
जो वैदिक सूर्यसूक्त रखते हैं उनके प्रातः पाठ। क्रम आश्रम में सीखिए।
पदार्थ
- केतवः — केतु / रश्मि
- जातवेदसम् — जातवेदस्
ṚV 1.50.1 Śākala. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.