Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

पवित्र अध्ययन

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये

Devī Māhātmya (Durgā Saptaśatī) 11.10 (vulgate numbering of the Caṇḍī).

Devī Māhātmya (Durgā Saptaśatī) 11.10 (vulgate numbering of the Caṇḍī).

मूल शास्त्र-पाठ

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

IAST लिप्यन्तरण

sarvamaṅgalamāṅgalye śive sarvārthasādhike | śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te ||

समीपस्थ अनुवाद

हे सब मङ्गलों के मङ्गल, हे शिवा सर्वार्थसाधिका, हे शरण्या त्र्यम्बके गौरी नारायणि — तुम्हें नमस्कार।

पाठक-सुलभ अर्थ

देवी को मङ्गल का मङ्गल, शरण, त्रिनयन गौरी और नारायणी कहकर प्रणाम।

मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या

इस शाक्त घर में चण्डी जीवित आचार है। यह एक श्लोक सार्वजनिक है; पूरी सप्तशती आश्रम की पद्धति और पञ्जिका के अनुसार है।

साधना का प्रसंग

दुर्गा-दिनों और साधारण प्रणाम में गाया जा सकता है। पूरा चण्डी-पाठ लम्बा आचार है।

पदार्थ

  • शरण्ये — हे शरण्या
  • नारायणि — हे नारायणि

Devī Māhātmya vulgate 11.10; Sanskrit public domain. Foundation translation original. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.