Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

पवित्र अध्ययन

महामृत्युञ्जय मन्त्र

ṚV 7.59.12; also TS 1.8.6.2 / VS 3.60 (Tryambaka).

ṚV 7.59.12; also TS 1.8.6.2 / VS 3.60 (Tryambaka).

मूल शास्त्र-पाठ

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥

IAST लिप्यन्तरण

oṃ tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ puṣṭivardhanam | urvārukam iva bandhanān mṛtyor mukṣīya mā'mṛtāt ||

समीपस्थ अनुवाद

त्र्यम्बक का यजन करते हैं, सुगन्ध उनके, पुष्टि बढ़ाते हैं। खीरे की तरह बन्धन से मृत्यु से मुक्ति हो, अमृत से नहीं।

पाठक-सुलभ अर्थ

मरने की पकड़ से मुक्ति, फिर भी जीवन की धारा में रहना — यह वैदिक प्रार्थना है। अनन्त वर्षों का सौदा नहीं।

मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या

रोग में, शिव की तिथि पर, साधारण सन्ध्या में घर इसे पढ़ते हैं। आश्रम इसे त्रिनयन के प्रति विश्वास सुनता है, खरीदी ढाल नहीं। शरीर की चिकित्सा चिकित्सक की; यह ध्वनि साहस रखती है।

साधना का प्रसंग

शान्त मुख से पढ़िए। गिनती के साथ निश्चित चिकित्सा-फल मत बाঁধिए।

पदार्थ

  • त्र्यम्बकम् — त्रिनयन
  • यजामहे — यजन करते हैं
  • मुक्षीय — मुक्त होऊँ

ṚV 7.59.12; public-domain saṃhitā. Also Yajurvedic Tryambaka. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.