पवित्र अध्ययन
अन्नपूर्णा उपनिषद्
ज्ञान और पूर्ण आत्मा का दीर्घ पाठ; पूर्ण संहिता यहाँ दावा नहीं।
पहला अंश खुला है
अन्नपूर्णा, ज्ञान, संन्यास और अद्वय आत्मा।
अन्नपूर्णा उपनिषद् (मुक्तिका ७०, अथर्ववेद) दीर्घ पाठ, योग उपनिषदों के साथ भी गिना जाता है। इस वृत्त में इसलिए कि पोषण की देवी यहाँ ज्ञान और अद्वय आत्मा के रूप में सुनी जाती है।
पूर्ण सार्वजनिक पाठ त्रिभाषिक मेल के साथ अभी डेस्क पर नहीं। यह पृष्ठ परिचय है। खाली पाठक नहीं।
मुक्तिका ७०, अथर्ववेद। कुछ सूचियाँ इसे योग उपनिषद् में रखती हैं; यह वृत्त दोनों नाम दिखाता है।
प्रचलित मुद्रण में कई अध्याय। यहाँ अध्याय-संख्या पूर्ण नहीं कही जाती।
मुक्तिका ७०, अथर्ववेद। कुछ सूचियाँ इसे योग उपनिषद् में रखती हैं; यह वृत्त दोनों नाम दिखाता है।
समीक्षा में रोके गये पाठ
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