Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

पवित्र अध्ययन

ṚV 1.1.1 (Śākala saṃhitā)

ṚV 1.1.1 (Śākala saṃhitā)

ṚV 1.1.1 (Śākala saṃhitā)

मूल शास्त्र-पाठ

अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् । होतारं रत्नधातमम् ॥

IAST लिप्यन्तरण

agnim īḷe purohitaṃ yajñasya devam ṛtvijam | hotāraṃ ratnadhātamam ||

समीपस्थ अनुवाद

अग्नि की स्तुति करता हूँ, यज्ञ के पुरोहित देव-ऋत्विज्, होता, रत्न धारण करने वालों में श्रेष्ठ।

पाठक-सुलभ अर्थ

संहिता यज्ञ के आगे खड़े अग्नि का नाम लेकर खुलती है, जो हवि ढोता है।

मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या

इस घर में पहली ऋक् अभिवादन है: गुरु के सामने अतिथि जैसे बैठता है, अग्नि के सामने वैसे बैठिए।

पदार्थ

  • अग्निम् — अग्नि
  • ईळे — स्तुति करता हूँ
  • पुरोहितम् — पुरोहित

Śākala Ṛgveda 1.1.1 as printed in public-domain saṃhitā editions. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.