पवित्र अध्ययन
मुख्य उपनिषद्
इस ग्रन्थालय में पास रखे तेरह उपनिषदों का अध्ययन-वृत्त।
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दस मुख्य उपनिषद् वह वृत्त हैं जिन पर शङ्कर ने भाष्य लिखा और जिन्हें वेदान्त-शिक्षा आज भी प्रथम श्रवण मानती है: ईशा, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक। यह ग्रन्थालय श्वेताश्वतर, कौषीतकि और मैत्रायणीय जोड़ता है क्योंकि वे उसी सार्वजनिक संवाद के बहुपठित साथी हैं — दूसरा ‘शीर्ष तेरह’ गढ़ने के लिए नहीं। अन्य उपनिषद् मुक्तिका सूची पर सम्मानित हैं।
इस वृत्त में और नाम भी बसते हैं। गायत्री, ॐ या ऋक् लिखकर देखें।
ईश उपनिषद्
परम्परा से Shukla Yajurveda के साथ सुना जाता है।
केन उपनिषद्
परम्परा से Samaveda के साथ सुना जाता है।
कठ उपनिषद्
परम्परा से Krishna Yajurveda के साथ सुना जाता है।
प्रश्न उपनिषद्
परम्परा से Atharvaveda के साथ सुना जाता है।
मुण्डक उपनिषद्
परम्परा से Atharvaveda के साथ सुना जाता है।
माण्डूक्य उपनिषद्
परम्परा से Atharvaveda के साथ सुना जाता है।
तैत्तिरीय उपनिषद्
परम्परा से Krishna Yajurveda के साथ सुना जाता है।
ऐतरेय उपनिषद्
परम्परा से Rigveda के साथ सुना जाता है।
छान्दोग्य उपनिषद्
परम्परा से Samaveda के साथ सुना जाता है।
बृहदारण्यक उपनिषद्
परम्परा से Shukla Yajurveda के साथ सुना जाता है।
श्वेताश्वतर उपनिषद्
परम्परा से Krishna Yajurveda के साथ सुना जाता है।
कौषीतकि उपनिषद्
परम्परा से Rigveda के साथ सुना जाता है।
मैत्रायणीय उपनिषद्
परम्परा से Krishna Yajurveda के साथ सुना जाता है।