Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

पवित्र अध्ययन

पाठ-परम्पराएँ और पाठभेद

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प्रारूप — समीक्षा बाकी

वेद शाखाओं में आता है। यहाँ ऋग्वेद शाकल संहिता है, जब तक अन्य शाखा नामित न हो। शुक्ल और कृष्ण यजुर्वेद दो परिवारों के रूप में अनुक्रमित हैं, एक चपटी पुस्तक नहीं।

इतिहास और गीता के मुद्रण प्रायः प्रचलित पाठ पर चलते हैं। आलोचनात्मक संस्करण कभी दूसरा अंक देते हैं। श्लोक खुलने पर संस्करण का नाम रहता है। सजावट के लिए अंक चुपचाप नहीं सरकाया जाता।

मुक्तिका की एक सौ आठ उपनिषद् एक प्रिय कानन है। अन्य सूचियाँ भी हैं। उन्हें रहने दिया जाता है। यह कक्ष उन्हें डाँटता नहीं।

जहाँ विद्वान् अभी विवाद करते हैं — उत्तरकाण्ड, कश्मीरी गीता की अतिरिक्त पंक्ति, पैप्पलाद सूक्त — अनुक्रमणिका नाम रख सकती है, टिप्पणी में विवाद दिखाई देता है। यह परम्परा के प्रति आतिथ्य है, हिचकिचाहट नहीं।