पवित्र अध्ययन
पाठ, अनुवाद और भाष्य कैसे पहचाने जाते हैं
प्रत्येक पंक्ति उत्तर दे सके: ये किसके शब्द हैं?
प्रारूप — समीक्षा बाकी
मूल पाठ देवनागरी संस्कृत है, नामित सार्वजनिक संस्करण या संहिता से। यह रचित नहीं है।
लिप्यन्तरण IAST है, ताकि देवनागरी के बिना भी शब्द का आकार सुना जा सके।
समीपस्थ अनुवाद व्याकरण के पास रहता है। पाठक-अर्थ समास या संस्कृति का इशारा खोल सकता है। अलग रखे जाते हैं, ताकि एक दूसरे का वेष न धरे।
पारम्परिक भाष्य हो तो सम्प्रदाय या लेखक का नाम होता है। शङ्कर का वाक्य शङ्कर कहा जाता है। उस परत में मौन का अर्थ है भाष्य अभी आया नहीं, यह नहीं कि भाष्य है ही नहीं।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या इस आश्रम की सार्वजनिक शिक्षा-वाणी है। पूजा, करुणा, गुरु की ओर संकेत कर सकती है। एकमात्र पाठ होने का दावा नहीं करती, मन्त्र का फल भी नहीं बेचती।