শুভ মহালয়া शुभ महालय 10 अक्टूबर 2026 · 22 आश्विन 1433 · आश्विन अमावस्या

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    Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

    पवित्र अध्ययन

    Bhagavad Gītā 2.48 (vulgate)

    Bhagavad Gītā 2.48 (vulgate)

    Bhagavad Gītā 2.48 (vulgate)

    मूल शास्त्र-पाठ

    योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय । सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥

    IAST लिप्यन्तरण

    yogasthaḥ kuru karmāṇi saṅgaṃ tyaktvā dhanañjaya | siddhyasiddhyoḥ samo bhūtvā samatvaṃ yoga ucyate ||

    समीपस्थ अनुवाद

    योग में स्थित होकर कर्म करो, संग छोड़कर, धनञ्जय। सिद्धि और असिद्धि में सम होकर समत्व को योग कहते हैं।

    पाठक-सुलभ अर्थ

    यहाँ योग का नाम समत्व है, हाथ काम करते रहते हैं।

    मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या

    श्रम के बाद कीर्तन इस समत्व को सुनाई देने योग्य बनाता है।

    पदार्थ

    • योगस्थः — योग में स्थित
    • समत्वम् — समत्व

    Gītā 2.48, eighteen-chapter vulgate. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.