Maa Kali dressed with lights, flowers, and the scythe of the shrine.

पवित्र अध्ययन

Bhagavad Gītā 2.47 (vulgate)

Bhagavad Gītā 2.47 (vulgate)

Bhagavad Gītā 2.47 (vulgate)

मूल शास्त्र-पाठ

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन । मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥

IAST लिप्यन्तरण

karmaṇy evādhikāras te mā phaleṣu kadācana | mā karmaphalahetur bhūr mā te saṅgo 'stv akarmaṇi ||

समीपस्थ अनुवाद

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म में है, फलों में कभी नहीं। कर्मफल का हेतु मत बनो; अकर्म में भी संग न रहे।

पाठक-सुलभ अर्थ

श्लोक कर्म पर अधिकार देता है, फसल छोड़ देता है। अकर्म छिपने का घर भी मना है।

मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या

इस आश्रम की सेवा हाथों सहित यह श्लोक है: पकाना, बुहारना, प्रणाम, फल मन्दिर पर छोड़ देना।

पदार्थ

  • कर्मणि — कर्म में
  • अधिकारः — अधिकार
  • फलेषु — फलों में

Gītā 2.47, stable across common Indian vulgate prints. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.