पवित्र अध्ययन
व्यास महाभारत
महाभारत अठारह पुस्तकें, हरिवंश उनके साथ चलता है।
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व्यास का महाभारत अठारह पर्वों में आता है। उपपर्व और अध्याय-संख्या प्रचलित पाठ और बोरी आलोचनात्मक संस्करण में भिन्न हैं। यह सूची अठारह पारम्परिक नाम लेती है।
भगवद्गीता भीष्मपर्व में कही गई है और इस ग्रन्थालय में अपना द्वार पाती है। हरिवंश खिल है — कृष्ण के वंश का परिशिष्ट — अठारह पर्वों के साथ चलता है।
इस वृत्त में और नाम भी बसते हैं। गायत्री, ॐ या ऋक् लिखकर देखें।
आदिपर्व
आरम्भ, वंश और कथा का सभा-गृह।
सभापर्व
सभा और पासा।
आरण्यकपर्व
वनवास। वनपर्व भी कहा जाता है।
विराटपर्व
छद्मवेश में तेरहवाँ वर्ष।
उद्योगपर्व
युद्ध की तैयारी।
भीष्मपर्व
भीष्म की सेनापतिता; गीता यहाँ सुनी जाती है।
द्रोणपर्व
द्रोण की सेनापतिता।
कर्णपर्व
कर्ण की सेनापतिता।
शल्यपर्व
शल्य की सेनापतिता और गदा-युद्ध।
सौप्तिकपर्व
रात्रि का आघात।
स्त्रीपर्व
स्त्रियों का विलाप।
शान्तिपर्व
राजधर्म और शान्ति पर भीष्म की शिक्षा।
अनुशासनपर्व
आगे का अनुशासन।
आश्वमेधिकपर्व
अश्वमेध।
आश्रमवासिकपर्व
आश्रमवास।
मौसलपर्व
मूसल और यादव-अन्त।
महाप्रस्थानिकपर्व
महाप्रस्थान।
स्वर्गारोहणपर्व
आरोहण।
हरिवंश
महाभारत का खिल, अठारह पर्वों के साथ चलता है।