पवित्र अध्ययन
प्रणव (ॐ)
Praṇava; śruti as the seed-syllable of Veda (traditional). Printed here as the single syllable ॐ.
Praṇava; śruti as the seed-syllable of Veda (traditional). Printed here as the single syllable ॐ.
मूल शास्त्र-पाठ
ॐ
IAST लिप्यन्तरण
समीपस्थ अनुवाद
ॐ।
पाठक-सुलभ अर्थ
ॐ वह बीज-ध्वनि है जो श्वास को एक स्वर में समेटती है। अध्ययन, पूजा और मौन बैठना इसी विश्राम-स्वर से खुलते हैं।
मीनानन्द सम्पादकीय व्याख्या
मीनानन्द आश्रम में प्रणव को ध्यान और प्रेम से ग्रहण किया जाता है। पवित्र वाणी यहीं से आरम्भ होती है, और मन भी इसी स्वर में मौन लौटता है। कितनी देर बैठना है, और यह आपके अन्य मन्त्रों से कैसे जुड़ता है — यह मार्ग जीवित शिक्षक दिखाते हैं। इस मन्त्र का गहरा अर्थ, जप की लय या दीक्षा का मार्ग जानने के लिए मीनानन्द आश्रम से सम्पर्क कीजिए।
साधना का प्रसंग
घर की रीति के अनुसार पाठ ॐ से आरम्भ और समाप्त कीजिए। निजी जप-संख्या के लिए आश्रम से बात कीजिए।
पदार्थ
- ॐ — प्रणव
Praṇava as received in Vedic recitation; single-syllable public form. Sanskrit: public domain. Foundation translations: CC BY-SA 4.0.