गुह्य ज्ञान
शब्दकोश
आवर्ती संस्कृत एवं अध्ययन-पदों की सरल परिभाषाएँ।
- आचार (Ācāra)
- आचरण, अनुष्ठान-पालन या साधना की रीति; वर्गीकरण ग्रन्थभेद से भिन्न होता है।
- आगम (Āgama)
- “जो उतर आया है”; प्रकट शास्त्र या शास्त्र-वर्ग, विशेषतः शैव, शाक्त और वैष्णव परिवेश में।
- आम्नाय (Āmnāya)
- संचरण, पवित्र धारा या दिशात्मक प्रकाशन; प्रायः परम्परा-विशिष्ट योजनाओं में प्रयुक्त।
- भैरव (Bhairava)
- शिव का उग्र एवं अतिक्रान्त रूप/नाम, कई तान्त्रिक परम्पराओं के केन्द्र में।
- भक्ति (Bhakti)
- भक्ति, दिव्य के साथ प्रेमपूर्ण भागीदारी या सम्बन्ध।
- भगवद्गीता (Bhagavad Gītā)
- महाभारत में कृष्ण–अर्जुन संवाद, प्रायः गीता कहा जाता है (अंग्रेज़ी में Geeta भी); धर्म, कर्मयोग, ज्ञान और भक्ति का उपदेश।
- बीज (Bīja)
- “बीज”; देवता या शक्ति से जुड़ा संक्षिप्त मन्त्राक्षर। अनेक प्रयोग दीक्षा-विशिष्ट होते हैं।
- चक्र (Cakra)
- चक्र, वृत्त या केन्द्र; सूक्ष्मशरीर के मानचित्र में कई सम्भावित कमल-सदृश केन्द्रों में से एक। व्यवस्थाएँ भिन्न हैं।
- दर्शन (Darśana)
- पवित्र को देखना और उसके द्वारा देखा जाना; दार्शनिक दृष्टि या मत भी।
- देवी (Devī)
- देवी; “दीप्त/दिव्य सत्ता।”
- दीक्षा (Dīkṣā)
- दीक्षा या अभिषेक जो साधक के पथ के सम्बन्ध को अधिकार देता और रूपान्तरित करता है।
- गुरु (Guru)
- आध्यात्मिक भार या प्रामाणिकता का शिक्षक; भूमिका नैतिक जवाबदेही नहीं हटाती।
- गुह्य (Guhya)
- छिपा, गोपनीय, अन्तर्वर्ती, रक्षित या गूढ़।
- ज्ञान (Jñāna)
- ज्ञान, अन्तर्दृष्टि या मुक्तिदायी बोध।
- इतिहास (Itihāsa)
- “ऐसा हुआ”; रामायण और महाभारत को समेटने वाला पवित्र आख्यान-वर्ग।
- कौल (Kaula)
- *कुल* (“परिवार,” “समग्रता,” “देहधारी समूह”) से जुड़ी तान्त्रिक धाराओं का विस्तृत परिवार, स्रोतभेद से भिन्न व्याख्या।
- कालीकुल (Kālīkula)
- काली और सम्बद्ध रूपों को केन्द्र में रखने वाली देवी-परम्पराओं के परिवार।
- कुण्डलिनी (Kuṇḍalinī)
- “कुण्डलीकृत”; योगिक और तान्त्रिक व्यवस्थाओं में भिन्न-भिन्न वर्णित रूपान्तरकारी शक्ति।
- मण्डल (Maṇḍala)
- अनुष्ठान और ध्यान में प्रयुक्त संरचित पवित्र क्षेत्र, वृत्त, अधिष्ठान या चित्र।
- महाभारत (Mahābhārata)
- भारत वंश, कुरुक्षेत्र में पाण्डव–कौरव युद्ध और भगवद्गीता को समेटने वाला संस्कृत इतिहास।
- मन्त्र (Mantra)
- निश्चित परम्परा में प्रयुक्त अभिषिक्त ध्वनि-रूप, अक्षर, नाम, वाक्य या श्लोक।
- मुद्रा (Mudrā)
- मुद्रा, संकेत या देह-विन्यास; अर्थ कलात्मक और अनुष्ठानिक सन्दर्भ पर निर्भर करता है।
- नाड़ी (Nāḍī)
- सूक्ष्मशरीर मानचित्र की नलिका; स्नायु या रक्तवाहिनी के समान नहीं।
- न्यास (Nyāsa)
- अनुष्ठानिक “स्थापन” या अधिष्ठापन, प्रायः देह में मन्त्र या देवतांश; विस्तृत क्रम सीमित हो सकते हैं।
- पाञ्चरात्र (Pāñcarātra)
- नारायण/वासुदेव पूजा से जुड़ी प्रमुख वैष्णव शास्त्रीय और अनुष्ठान-परम्परा।
- पाण्डव (Pāṇḍava)
- पाण्डु का पुत्र या वंशज। पाँच पाण्डव (पञ्च पाण्डव) युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव हैं।
- पद्धति (Paddhati)
- पूजा का प्रथागत क्रम या निर्देश-ग्रन्थ (पूजा पद्धति)। देवता, प्रदेश और परम्पराभेद से भिन्न; यह स्थल फाउंडेशन के अनुष्ठान-चरणों का आविष्कार नहीं करता।
- प्राण (Prāṇa)
- जीवन-श्वास या प्राण-प्रक्रिया; अर्थ सामान्य श्वसन से आगे भी जाता है।
- प्रत्यभिज्ञा (Pratyabhijñā)
- पहचान; विशेषतः चेतना के सार्वभौम स्वभाव को पहचानने वाले अद्वैत शैव दर्शन से जुड़ी।
- पूजा (Pūjā)
- दिव्य उपस्थिति के प्रति अर्पण, ध्यान और आतिथ्य के माध्यम से उपासना।
- पुराण (Purāṇa)
- सृष्टितत्त्व, वंशावली, पवित्र स्थान, देवता और भक्ति से जुड़े संस्कृत आख्यान और धर्मग्रन्थों का विस्तृत वर्ग।
- रामायण (Rāmāyaṇa)
- राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण-संघर्ष का इतिहास; वाल्मीकि का संस्कृत काव्य अनेक कथनों में शास्त्रीय साहित्यिक स्रोत है।
- साधना (Sādhana)
- सिद्धि या धार्मिक लक्ष्य की ओर उन्मुख अनुशासित अभ्यास।
- सहदेव (Sahadeva)
- महाभारत में पञ्च पाण्डवों में सबसे छोटे, नकुल के जुड़वाँ; इस वेबसाइट के शैक्षिक पथप्रदर्शक का नाम भी, उसी विवेकशील चरित्र से लिया गया।
- सम्प्रदाय (Sampradāya)
- संचरित धार्मिक समुदाय, शिक्षा-परम्परा या परम्परा।
- शैव (Śaiva)
- शिव या शैव परम्पराओं से सम्बन्धित।
- शाक्त (Śākta)
- शक्ति/देवी या देवी-परम्पराओं से सम्बन्धित।
- शक्ति (Śakti)
- शक्ति, सामर्थ्य या दिव्य ऊर्जा; शाक्त परम्पराओं में परम सत्ता के रूप में देवी भी।
- श्रीचक्र (Śrīcakra)
- श्रीविद्या का केन्द्रीय पवित्र चित्र; सामान्य सजावटी ज्यामिति नहीं।
- श्रीकुल (Śrīkula)
- श्री/त्रिपुरसुन्दरी-उन्मुख देवी-परम्पराएँ, विस्तृत वर्गीकरण में प्रायः कालीकुल के विपरीत कही जाती हैं।
- सिद्धि (Siddhi)
- सिद्धि, पूर्णता या असाधारण सामर्थ्य; शक्ति-अन्वेषण नैतिक और आध्यात्मिक रूप से विवादास्पद है।
- तन्त्र (Tantra)
- सन्दर्भ के अनुसार शास्त्र, व्यवस्था, मत, अथवा इस संग्रह में विवेचित परम्पराओं का विस्तृत परिवार।
- तत्त्व (Tattva)
- सिद्धान्त, सत्ता-वर्ग या घटक जिससे प्रकटीकरण और अनुभव का मानचित्र बनता है।
- उपनिषद् (Upaniṣad)
- परम सत्ता, आत्मा, ज्ञान, मृत्यु, अनुष्ठान का आन्तरिकीकरण, भक्ति और बाद के योग-विचारों से जुड़े विविध ग्रन्थ-समूह। एकमात्र गणना नहीं: पारम्परिक सूची १०८ नाम देती है; मुख्य (mukhya) समूह लगभग दस से तेरह सबसे अधिक पढ़ा जाता है।
- वज्रयान (Vajrayāna)
- “वज्र/हीरक यान”; तान्त्रिक बौद्ध पथों का विस्तृत नाम, आन्तरिक रूप से विविध।
- वेद (Veda)
- प्राचीन, स्तरित संस्कृत प्रकाशन। वेद चार हैं: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद, प्रत्येक के साथ संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद् स्तर।
- यन्त्र (Yantra)
- यन्त्र या पवित्र चित्र जिसकी पहचान विशिष्ट देवता, ग्रन्थ और उपयोग की है।